मुस्कुराये जा ओ लड़कपन
खोंना ना ये बचपन
हम भी तुम्हे देख के
वो दिन याद करते है .
ना चिंता ना फिकर
खेलते अटर -सटर
थे सबसे बड़े राजा
ख़ुद ढोल ख़ुद ही बाजा .
दौड़ते हो जैसे धावक
सबसे गजब खिलाड़ी
चार दोस्तों की टोली
जब सजती थी सवारी .
गरीबी और अमीरी का
ना इनको मोल भाव
ना जाति पात जाने
सबको गले लगा लें .
ये दानियों में दानी
एक टाफी दस में बांटे
रूठे कोई इनसे
रोके भी मना ले .
जैसे हो वैसे रहना
ना बालपन ये खोना
तुम येसे ही हो अच्छे
ओ बच्चे मन के सच्चे .