दीपों के उजियारे में
खूब मनाई दीवाली
दीप तले अंधियारे सी
आस पास की परछाईं .
पास उनके ना दिया तेल
बाती भी थी ना बनाई
घऱ के नन्हे चिराग भी
रोनी सूरत थी बनाई .
मोहल्ले का मिठाई वाला बोला
आजा तुझे खिलाऊ मिठाई
मिठाई नही बस एक दीपक का उपकार
दीवाली का सपना अपनी माँ का करना है साकार .